2000
राज्य में कांग्रेस राज्य के दौरान एस.टी/एस.सी की महिलाओं के विरूद्ध बढ रहे अपराधों को लेकर आन्दोलन।
The historical journey of struggles and public movements led by Dr. Kirodi Lal Meena
Timeline
Year Range
Total Movements
116+
Batches
27
Timeline
Total Movements
116+
Batch
7
राज्य में कांग्रेस राज्य के दौरान एस.टी/एस.सी की महिलाओं के विरूद्ध बढ रहे अपराधों को लेकर आन्दोलन।
सिपाही दामोदर के हत्याकांड को लेकर 5.6.2000 को धरना दिया गया।
धर्मेन्द्र मेघवंशी की अजमेर में पुलिस हिरासत की मौत में कार्यवाही को लेकर 19.6.2000 को जयपुर में धरना दिया गया।
जिला सवाईमाधोपुर के चैथ का बरवाडा क्षेत्र के बघीना गांव में हुए नरसंहार में अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर 10.7.2000 को सवाईमाधोपुर मुख्यालय पर धरना दिया गया।
ग्राम सलालपुर गंगापुर में मिट्ठू माली के अपहरण को लेकर उपखण्ड कार्यालय गंगापुर पर धरना।
शांति मीणा आत्मदहा प्रकरणः- बस्सी चक में शांति मीणा के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए नेशनल हाईवे-11 पर चक्का जाम कर दिया। जेडीए की कार्यवाही के दौरान शांति का मकान तोड दिया जिससे उसने तेल छिडक कर मौके पर ही आत्मदाह कर लिया। आन्दोलन के कारण कलेक्टर मौके पर पहुंचे तथा ठोस कार्यवाही के बाद आन्दोलन समाप्त कर दिया।
आमेर में विदेशी महिला के अत्याचार को लेकर आन्दोलनः- एक विदेषी महिला श्रीमती रश्मि डिकिन्सन वीजा पर विदेष (इग्लैण्ड) से भारत यात्रा पर आई और उसने यहां सरकार से सांठ-गांठ कर कोडियों के भाव में आमेर फोर्ट के पास जमीन खरीद ली। वीजा पर आया कोई विदेषी ट्स्ट गठित कर हमारे देष में जमीन नही खरीद सकता किन्तु रश्मि डिकिन्सन ने यह कमाल कर दिखाया। आमेर में आदिवासियों की जमीन पर फर्जी कागजात बनवाकर कब्जा कर लिया। राष्ट्ीय अध्यक्ष श्री मुरली मनोहर जोषी जी ने भी इसकी सिफारिष की तथा श्रीमती वसुन्धरा राजे ने भी इसे सपोट किया, 10 जनपथ से भी इसे सहयोग प्राप्त था जिस कारण इस संदेह के घेरे में आई महिला को गहलोत सरकार ने इसे जमीन दे दी। किन्तु मैने इसके खिलाफ आन्दोलन किया तथा इस विदेषी महिला के पैर नही टिकने दिये एवं गैर कानूनी रूप से हांसिल की गई जमीन से कब्जा हटवाकर आदिवासियों को कब्जा बहाल करवा दिया।
रामगढ पचवारा प्रकरणः- ग्राम आभानेरी में हुए एक विवाह को लेकर पुलिस प्रशासन ने गांव के करीबन 13 नर-नारियों को गिरफ्तार कर लिया, ये सारे गिरफ्तार लोग निर्दोष थे। इसके लिए बड़ी सभा के बाद थाने के सामने विशाल धरना दिया गया और रविवार के दिन दौसा सर्किट हाउस में अदालत में सुनवाई करने के बाद ।ब्श्रड ने सभी लोगों को छोड़ दिया।
सवाईमाधोपुर में धमान्तरण के विरूद्ध आन्दोलन।
ओलवाडा एवं इंदिरा लिफ्ट सिंचाई योजना की स्वीकृति हेतु 20 अक्टूबर 2001 को सवाईमाधोपुर कलेक्ट्रेट पर धरना।
खण्डार, बामनवास, कैलादेवी, गंगापुर, टोडाभीम की विभिन्न घटनाओं को लेकर आन्दोलन।
राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ आन्दोलनः- सन् 2001 मेे ग्राम मलारना डूंगर एवं बहतेड (जिला सवाईमाधेापुर) में सिमी की राष्ट्र विरोधी गतिविधि चरम पर थी। 15 अगस्त के दिन मलारना डूंगर की उच्च माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्र विरोधी तत्वों ने तालिबान के समर्थन में नारे लिख दिए, दीवारों पर पाकिस्तान जिन्दाबाद लिख दिया। राष्ट्रगान का विरोध किया। इसको लेकर सवाईमाधोपुर में 7 दिवसीय धरना दिया गया तथा ऐसे राष्ट्र विरोधी तत्वों को चिन्हित कर गिरफ्तारी की मांग की गई। इस राष्ट्र विरोधी अभियान में मलारना डूंगर एवं बहतेड के कुछ लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद धरना समाप्त कर दिया।
फूलचन्द हत्याकाण्ड सांगानेर को लेकर आन्दोलन।
जेडीए जयपुर की कई महत्वपूर्ण जमीनों पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया। इसे लेकर 18.2. 2002 को जेडीए का घेराव किया गया।
खण्डार के सोन कच्छ में सुषीला गुर्जर की हत्या को लेकर धरना।
गंगापुर गोली कांडः- गंगापुर सिटी (जिला सवाईमाधोपुर) में बालाजी चैक वाले हुनमान जी के मंदिर में हर वर्ष की भांति काफी श्रद्धालु 25 मार्च 2002 को हवन यज्ञ के दर्शनार्थ उपस्थित थे। बिना कोई पूर्व चेतावनी के पुलिस ने श्रद्वालुओं को चारों तरफ से घेरकर लाठियांे से मारना पीटना शुरू कर दिया। इस कारण अफरा-तफरी मच गई। श्रद्वालु अपने बचाव में इधर-उधर मागने लगे इसी बीच तत्कालीन उपखण्ड अधिकारी वृत्ताधिकारी, थानाधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने गोलियां चलाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उपखण्ड अधिकारी के हाथ में रिवाल्वर था जिससे वो गोलियां चला रहा था तथा निर्दोष लोगों पर अंधा-धुन्ध गोलियों की बौछार होने लगी जिसमें धर्मसिंह तो गोली लगने से ढेर हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। अनेक लोग गोलियों की बौछारों से घायल हो गये। उक्त अधिकारीगण एवं पुलिसकर्मी भागते हुए श्रद्वालुओं का पीछा करते हुए गोलियां चलाते रहे। वकील कैलाशचन्द शर्मा का आॅफिस (जो कि एक मंजिल पर है) में खडे सतीश चन्द को पुलिस ने गोलियों से भून डाला उसे जान से मार डाला। इस प्रकार पुलिस अधिकारियों एवं उपखण्ड अधिकारी की तानाशाही के कारण तीन युवक शहीद हो गये एवं अनेकों घायल हो गये उनमें से कई तो आज तक भी विकलांग है। इस घटना के बाद शहर में अचानक कफ्र्यू लगा दिया गया जिससे घायलों को चिकित्सा दिलाना भी असंभव हो गया, अनेक गंभीर घायलों को जयपुर के सवाईमानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया। मैने प्रशासन की इस घिनौनी घटना के विरोध में जनसमर्थित आन्दोलन किया तथा पूरी पार्टी ने इसे दमदारी से उठाया, हिन्दू संगठन भी इसमें कूद पडे़, प्रतिपक्ष के नेता, एक दर्जन विधायक भी गंगापुर इस आन्दोलन में शामिल हुए। आखिर में पुलिस सहित उपखण्ड अधिकारी को निलंबित किया गया तथा हत्या का मुकदमा दर्ज किया, न्यायिक जांच के आदेश सरकार ने किए। दो बार
गढहिम्मतसिंह गांव के बबलू गुर्जर की बदमाशों ने हत्याकर दी उसको इंसाफ दिलाने हेतु धरना।
पांचना पानी को लेकर आन्दोलन - पांचना के पानी को छोडे जाने के लिए जन समर्थित आन्दोलन किया गया किन्तु बगलाई के एक युवक की मौत के बाद उसे स्थगित कर दिया गया।
मीणा छात्रावास प्रकरण सवाईमाधोपुर हेतु आन्दोलन।
सवाईमाधोपुर में लटिया नाले को सूरवाल बांध में डाले गाव के लिए 22 जुलाई 2002 को सवाईमाधोपुर में धरना।
चम्बल नदी की इंदिरा लिफ्ट सिंचाई योजना को स्वीकृत कराने के लिए 20 अक्टूबर 2002 को सवाईमाधोपुर कलेक्ट्रेट पर धरना।
पुलिस द्वारा शराब माफियाओं से मिलकर बस्सी क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार करने पर जयपुर में धरना।
टोडाभीम तहसील की 11 पंचायतों को दौसा में शामिल करने एवं मण्डावर को उपतहसील बनाने के लिए आन्दोलन।