प्रमुख आंदोलन

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के संघर्षों और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक यात्रा

23.5.1980 - 19864% पूर्ण
23.5.1980 - 1986

23.5.1980 - 1986

समयरेखा

कुल आंदोलन

116+

बैच

1

आंदोलन: 1-25
1

23.5.1980

बौल (तहसील टोडाभीम) में समाज कंटकों द्वारा लोगों पर प्राणघातक हमला करने के कारण 32 लोग जख्मी हो गये। समाज कंटकों की गिरफ्तारी के लिए तहसील टोडाभीम मुख्यालय पर 7 मई 1980 को धरना दिया गया।

2

अगस्त 1980

रोडवेज के बढे किराये को लेकर आन्दोलनः-राज्य में रोडवेज के बढे किराये को लेकर महवा में अगस्त 1980 में रास्ता रोको आन्दोलन किया इसे लेकर सीआरपीसी धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।

3

मई 1981

विभिन्न समस्याओं को लेकर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ हिण्डौन उपखण्ड अधिकारी के कार्यालय पर धरना दिया।

4

जून 1981

1981 में पुलिस ज्यादातियों को लेकर महवा बन्द किया तथा तहसील कार्यालय पर प्रदर्शन कर सैकड़ों लोगों के साथ धरना दिया गया।

5

जुलाई 1982

रेल रोको आन्दोलनः- मण्डावर में रेल के स्टॉपेज हेतु रेल रोको आन्दोलन किया गया। - दो बार

6

मार्च 1982

जिले में कानून की खराब स्थिति एवं बिजली की मांग को लेकर सैकड़ों लोगों के साथ सवाईमाधोपुर मुख्यालय पर धरना दिया गया।

7

अप्रेल 1982

जिला बनाने की मांगः-1982 में दौसा को जिला बनाने की मांग को लेकर महवा में रास्ता रोको आन्दोलन किया गया। इस आन्दोलन के दौरान डा. किरोड़ीलाल सहित 14 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। - दो बार

8

फरवरी 1983

महवा क्षेत्र की विभिन्न जन समस्याओं को लेकर सैकड़ों लोगों के साथ धरना दिया गया।

9

अक्टूबर 1983

बढती महंगाई को लेकर आन्दोलनः- महंगाई के विरोध में महवा में चक्का जाम एवं गिरफ्तारी।

10

नवम्बर 1983

पुलिस की लूटः-दिनांक 8.11.1983 को ग्राम करीरी गाजीपुर (तहसील टोडाभीम) के कुछ काश्तकार ऊॅंटगाडियों से अपना अनाज हिण्डौनसिटी मण्डी में बैचने जा रहे थे उसी समय एक ट्रक ने बडागांव के पास ऊॅंटगाडियों में टक्कर मार दी जिससे श्री फाबूल्या एवं श्री शम्भू की मौके पर ही मौत हो गई तथा अन्य अनेक लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये। थाना सलेमपुर के तत्कालीन थानेदार श्री तिलकसिंह यादव व उसके स्टाफ ने घायलों की जेब से 1235/- रूपये निकाल लिये। दोषी पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए महवा-हिण्डौन सड़क मार्ग जाम किया गया, थानेदार के निलम्बन के बाद रास्ता खोल दिया गया।

11

मार्च 1984

बिगडती हुई कानून की स्थिति को लेकर महवा में एक आन्दोलन किया गया बाजार बन्द कराने के कारण एवं मनगढंत झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।

12

सितम्बर 1984

महवा एवं टोडाभीम क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर सम्बन्धित तहसील मुख्यालय पर धरने दिये गये।

13

सितम्बर 1984

पुलिस के भ्रष्टाचार के विरूद्ध महवा में धरना दिया।

14

सितम्बर 1984

हीराबाई बलात्कार एवं हत्याकांडः- दिनांक 12.9.1984 को मण्डी मण्डावर में हीराबाई नाम की 8 वर्षीया अबोध बालिका के साथ 25 वर्षीय रामजीलाल सैनी नाम के युवक द्वारा बलात्कार कर उसे एक कमरे में गाड दिया। इसको लेकर मण्डावर थाने पर उग्र प्रदर्शन कर दो दिवसीय धरना दिया गया जिसके बाद अपराधी को गिरफ्तार कर लिया।

15

अक्टूबर 1984

दौसा को जिला बनाने का आन्दोलन महवा में आन्दोलन किया।

16

नवम्बर 1984

समाज कंटकों के खिलाफ कार्यवाही को लेकर हिण्डौन में आन्दोलन।

17

नवम्बर 1984

भ्रष्टाचार से निजात दिलाने के लिए महवा में विशाल धरना।

18

दिसम्बर 1984

दौसा को जिला बनाने के लिए आन्दोलनः-1984 में सिकन्दरा (दौसा) चैराहे पर दौसा को जिला बनाने के लिए बडा आन्दोलन किया राजस्थान के मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर भी जाम में फस गये घण्टों वह मानपुर थाने पर बैठे रहे उनके निर्देश पर ही पुलिस ने बर्बरलाठी चार्ज कर दर्जनों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। फिर दूसरे दिन उन सभी कार्यकर्ताओं को छुडाने के लिए दौसा उपखण्ड अधिकारी का घेराव किया और जब तक छोडा नहीं तब तक घेराव रखा, सभी को छोडने के बाद आन्दोलन समाप्त रि दिया। 2 बार

19

दिसम्बर 1984

जंगलों के विनाश को रोकने के लिए आन्दोलनः- महवा एवं सिकराय के जंगलात से पुलिस व वन विभाग महवा के अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त रूप से मिलकर गीली लकडियों को कटवाकर ट्रकों के द्वारा क्षेत्र से पार करवाकर मेरठ, आगरा ले जाकर बिकवाते थे। हरे वृक्षों की कटाई कर ले जाते हुए ट्रकों को पकड़कर महवा थाने पर जप्त करवाये तथा दो दिन तक धरना दिया जब जाकर कटाई रूकी।

20

1984

क्षेत्र में बिगडती बिजली एवं कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में आन्दोलन। स्थानीय पुलिस ने चिढकर हमारे खिलाफ यह मुकदमा दर्ज किया।

21

1985

कुलदीप नीमरौट हत्याकांडः- तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरदेव जोशी के पुत्र श्री दिनेश जोशी द्वारा भारी रिश्वत लेकर एक आर.ए.एस. अधिकारी श्री कुलदीप नीमरोट के साथ साजिश पूर्ण तरीके से सडक दुर्घटना करवा दी। जिसमें श्री नीमरोट की मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस प्रकरण को मैने विधानसभा एवं सडकों पर आन्दोलन। इस प्रकरण को विधानसभा में नही उठाया जाए ऐसा तत्कालीन प्रतिपक्ष के नेता श्री भैरोसिंह शेखावत द्वारा मुझसे कहा गया। किन्तु सच्चाई कि आवाज नही दबे इस दृष्टि से यह मामला मैने सदन में उठाया तथा सड़को पर उतरा जिससे खिन्न होकर तत्समय भैरोसिंह जी ने नेता प्रतिपक्ष के पद से स्तीफा तक दे दिया था। बडे आग्रह के बाद स्तीफा वापस लिया । नीमरोट हत्याकाण्ड प्रकरण विधानसभा में उठाये जाने के बाद में अन्ततोगत्वा तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरदेव जोशी को हटा दिया गया। इससे चिढकर मा. मु. मं. श्री हरिदेव जोशी के पुत्र दिनेश जोशी ने बांसवाडा कोर्ट में एक मुकदमा दिनेश पुत्र श्री हरदेव जोशी बनाम कमला/किरोडीलाल (कुलदीप नीमरोट काण्ड) दर्ज करवा दिया। दो बार

22

1985

मण्डावर- बकरा-बकरी चोरी एवं रिश्वत कांडः- महवा-मण्डावर थाना (जिला सवाईमाधोपुर) पर श्री भैरोसिंह शेखावत के नेतृत्व में 24 विधायकों का ऐतिहासिक धरनाः- मैं 1985 में महवा से विधायक था। एक गरीब (रामसिंह कलाल निवासी मण्डावर) मेरे पास आया और कहा कि मेरे बकरे एवं बकरी को चोर ले गये। मेरी आजीविका उन्ही पर आधारित थी। चोर का भी पता है किन्तु पुलिस उन्हें पकड़ नही रही। मैंने मण्डावर के थानेदार को उस गरीब के बकरा-बकरी बरामद करने के लिए फोन कर तीन दिन का समय दिया। 3-4 दिन बाद वह गरीब कलाल मेरे पास आया और कहने लगा कि आपके टेलीफोन से तो उल्टा असर हो गया। मैने कहा क्या हुआ? उसने कहा थानेदार जी ने बकरा-बकरी बरामद तो कर लिए किन्तु बकरे को थाने वाले काटकर खा गये और बकरी उल्टी चारों को ही पकड़ा दी चोर मीणा था। यह सुनकर मैं अचंभित होकर आवेश में आ गया और 5-6 कार्यकर्ताओं को लेकर मण्डावर थाने पर जा धमका। मैं तो उस समय बहुत ही अनाड़ी था। मैने थानेदार को कहा कि इसके बकरा-बकरी की कीमत 2800 रूपये दो। अगर इसके बकरा-बकरी की कीमत नही दी तो आप जानते हो मैं डाक्टर हॅू, पेट चीरकर बकरे को निकाल लूंगा। थानेदार जी ने कहा शोर मत करो 2-3 घंटे का इंतजार करो। पैसे दे देंगे। मैं 5-6 लोगों को लेकर रात्रि के करीबन 10.00 बजे पुनः थाने पर पहुंचा। वहां अजीबो गरीब दृश्य देखा पुलिस ने रूपये देने की बजाय हम पर गोलियों की बौछार चालू कर दी। हम भगवान का नाम लेकर वही डटे रहे उनका मुकाबला किया। सोचा अगर इस बुराई को मिटाने की लड़ाई नहीं लड़ी और पीठ दिखाकर भाग गये तो गरीब के साथ धोखा होगा और ईश्वर हमें कभी भी माफ नहीं करेगा। हम सभी वहीं डटकर पुलिस से जूझते रहे और अन्ततोगत्वा पुलिस को उल्टे पैर लौटने को मजबूर कर दिया। बन्दूक की गोलियां मौत बनकर कई बार सायं-सायं करती हुई एकदम कानों के पास होकर निकली, ईश्वर ने साक्षात् मौत से मुझे बचा लिया और हम में से किसी को भी चोट नहीं आयी। ये सच है कि ‘‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’’ वाल कहावत हो गई। यह घटना सर्वविदित है। मा0 भैरोसिंह जी हमारे प्रतिपक्ष के नेता थे जिन्होने मुझे उस समय कहा था कि तुममें क्षमताएं बहुत है मैने तुम्हारी उंगली पकड़ली है इसे छोडना मत ऊंचाइयों तक पहुंचा दूंगा। किन्तु मेरा दुर्भाग्य था कि वह उंगली मेरी लापरवाही से छूट गई और मैं गुरू की उस अवज्ञा का परिणाम आज भी भुगत रहा हॅू। ऊंचाई तो दूर पैंदा भी नही मिल रहा है। इसका मुझे भारी अफसोस है। तत्समय दूसरे दिन यह घटना सुनते ही माननीय भैरोसिंह जी 24 विधायको को लेकर मण्डावर (जिला सवाईमाधोपुर) थाने पर बस भरकर पहुंच गये थाने पर ही धरना दे दिया। वसुन्धरा जी भी उस समय धौलपुर से विधायक थी। किन्तु किसी कारण से वह नहीं पहुंच पाई। 24 घण्टे अनवरत थाने के अन्दर धरना रहा। माननीय विधायको ने होली भी नहीं मनाई। पूरे थाने को सस्पेंड करवाकर ही वहां से उठे। पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर सवाईमाधोपुर को भी हटाये जाने के आश्वासन के बाद धरना हटा। उस गरीब को 2800 रूपये दिलवाये। यह क्या था? इस्तीफे पर विपरीत प्रतिक्रिया देने वाले नैतिकता का पाठ पढाने वाले इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे ? यह रामसिंह कलाल किस जाति का था। ऐसे गंभीर प्रकरण पर जान की बाजी लगाकर गरीब की मद्द की, उसकी समस्या का समय पर समाधान कराने का सौभाग्य मुझे मिला। सेवा, कत्र्तव्य, निष्ठा एवं समर्पण भाव से कार्य कर उसकी सेवा की जिससे मैने मेरे जीवन को सार्थक बना लिया।

23

फरवरी 1985

गायों की मौतः-बामनवास में गायों की मौत को लेकर धरना एवं दो दिवसीय अनशन।

24

जून 1985

विधायक का अत्याचारः- 1985 के चुनाव परिणामों में कांग्रेसी उम्मीदवार पचा नही पाये और महवा के हरिजनों की झौपडी में आग लगवाकर हमारे लोगों को झूंठे मुकदमें में फंसा दिया। निर्दोष लोगों को बचाने के लिए हिण्डौन में धरना दिया।

25

1986

दिल्ली में गिरफ्तारी को लेकर मुझे एवं अन्य 5 साथियों को गिरफ्तार कर दिल्ली तिहाड जेल में डाल दिया था, हमे 5 दिन तक तिहाड जेल में रखने के बाद रिहा किया।