प्रमुख आंदोलन

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के संघर्षों और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक यात्रा

जनवरी 1986 - 19877% पूर्ण
जनवरी 1986 - 1987

जनवरी 1986 - 1987

समयरेखा

कुल आंदोलन

116+

बैच

2

आंदोलन: 26-50
26

जनवरी 1986

मेहन्दीपुर बालाजी (जिला दौसा) में वन विभाग की स्थानीय निवासियों को रिहायशी मकान, दुकान एवं धर्मशाला की जमीन बताकर खुर्द बुर्द करने पर आन्दोलन।

27

फरवरी 1986

शराब बन्दी के कारोबार को लेकर श्री गुरूशरण छाबडा की अगुवाई में जयपुर कमिश्नरेट में धरना। - दो बार

28

जनवरी 1986

डकैतों के खिलाफ आन्दोलनः- खण्डार के छाण में डकैतो द्वारा व्यापारियों को धमकाने/व्यापारियों से अवैध वसूली करने पर सवाईमाधोपुर में धरना।

29

अक्टूबर 1986

डकैत अत्याचारः- छाण गांव में डकैतों के अत्याचार को लेकर धरना।

30

फरवरी 1986

बहरावंडा कांड को लेकर आन्दोलनः-बहरावण्डा के एक युवक को डकैत अपहरण करके ले गये और फिरौती की रकम मांगने लगे। आन्दोलन कर उसे डकैतो से मुक्त कराया।

31

मार्च 1986

बस-जीप काण्ड बाण गंगा नदी पर महवा में आन्दोलनः-एक रोडवेज बस के ड्राईवर की लापरवाही से इतना जबरदस्त एक्सीडेन्ट हुआ कि मौके पर चार लोगों की मौत हो गई इसमें कांग्रेस के नेता श्री रामस्वरूप उकडून मौत के मुहॅं में समा गये। पीडितों के परिवार को आर्थिक पैकेज दिलाने के लिए आन्दोलन किया गया।

32

अप्रेल 1986

करौली के कटकड मोड पर गोलीकाण्ड को लेकर आन्दोलनः- गंगापुर के कैलाश मीणा हत्याकाण्ड को लेकर कटकड (करौली) मोड पर जनता विरोध स्वरूप लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्षन कर रही थी किन्तु पुलिस ने प्रदर्षन कारियों पर बिना चेतावनी अंधा-धुन्ध गोलियां चलाई जिससे केदार मीणा की जांघ में गोली लगने से घायल हो गया। केदार के साथ कटकड के कई युवक भी घायल हो गये। केदार एवं उसके साथी दौसा काॅलेज में अध्ययनरत थे। कटकड मोड पर की गई फायरिंग के मामले को लेकर डा. किरोड़ीलाल ने जनता को साथ लेकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर करौली का दिन भर घेराव कर दोषी पुलिस कमिर्यो के विरूद्ध मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की। दोषी पुलिसकर्मियों के निलम्बन के बाद आन्दोलन वापस ले लिया।

33

जुलाई 1986

भेड़ भगाओं-वन बचाओं आन्दोलनः- राजस्थान के मारवाड से बर्षातकाल में प्रतिवर्ष हजारो की संख्या में भेड एवं उॅंट करौली, सवाईमाधोपुर में चराई के लिए प्रवेष कर जाते हैं। ये सभी पषुधन जंगल को बुरी तरह से तबाह कर देते थे। वन उपज की तबाही को रोककर वन एवं पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से डा. किरोडीलाल ने डांग के लोगों को साथ लेकर भेड भगाओ डांग बचाओं आन्दोलन किया जिसके लिए करीबन एक महीने तक अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय करौली में धरना दिया गया।

34

अगस्त 1986

कार्यकर्ताओं का दमनः- बून्दी के नैनवा में कार्यकर्ताओं पर प्रशासन आये दिन अत्याचार करता जिसके विरोध में नैनवा में धरना।

35

मई 1986

टैªक्टर चोरी प्रकरणः- हुडला सरपंच के टैªक्टर की बरामदगी के लिए हिण्डौन वृताधिकारी कार्यालय पर धरना।

36

जून 1986

जमीन हड़पनाः- करौली के डांक बंगले से सटी महत्वपूर्ण जमीन पर सत्ताधारियों के कब्जे को अति. जिला कलेक्टर करौली तथा संभागीय आयुक्त का घेराव करके धरना दिया।

37

1986

कालीसिल बांध का पानी छुडवानाः- कालीसिल बांध से सिंचाई हेतु पानी छोडे जाने के लिए सपोटरा में आन्दोलन किया। फसल सूखने लगी थी। सत्ताधारी एवं प्रशासन ने नहीं सुनी तो मैने स्वयं ने जनता को साथ लेकर बांध का पानी पुलिस प्रशासन की भारी संख्या के बीच भी सिंचाई हेतु खोल दिया।

38

1986

कानून की बेकार स्थिति पर हिण्डौन में धरना।

39

1986

बाछरैन (भरतपुर) में एक सेठ के डकैती हो गई थी पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की मैने थाने पर रातभर धरना दिया तो मुल्जिम पकडा गया तथा डकैती का माल बरामद हो सका।

40

1986

शिव पंचायत हेतुः- करौली पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर में शिव पंचायत बचाओं आन्दोलन किया

41

21.4.1987

रणथम्भौर जमीन प्रकरण को लेकर आन्दोलनः- थ्पमसक क्पतमबजवत श्री फतेह सिंह ने नेशनल पार्क में वन विभाग की जमीन को हेराफेरी कर अपने नाम करा लिया। उसको लेकर 21.4. 1987 को सवाईमाधोपुर कलेक्टेªट पर विशाल धरना दिया गया।

42

1987

मुक्ति जाटव प्रकरणः- मासलपुर थाने में एक महिला के साथ अन्याय और उत्पीड़न की शिकायत को लेकर आन्दोलन किया गया। डा. किरोड़ीलाल ने पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित कराई, दोषियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए, जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी कराई और पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाया। पीड़िता के पुनर्वास के लिए भी सहयोग किया गया। - दो बार

43

1987

कैलाश हत्याकांड हुआ गंगापुर में उसे मुसलमानो ने इसलिए मार दिया कि काॅलेज में कुछ मुस्लिम युवा एक हिन्दू छात्रा को छेड़ रहे थे, उसने मुसलमान युवको को रोका। मुस्लिम युवकों ने चाकू मार कर काॅलेज कैम्पस में हत्या कर दी कैलाश की। गंगापुर पहुंचकर मैने बड़ी सभा कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की हत्यारों को तो पुलिस ने गिरफ्तार किया नहीं उल्टा पुलिस ने मुझ सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर सेवर जेल में डाल दिया। पूरा जिला बन्द कर दिया जनता ने। जिला सवाईमाधोपुर, करौली के गांव-गांव जलने लगे। पूरी जनता सड़क पर उतर आई। सरकार झुकी और हमें बिना शर्त सेवर जेल से छोड़ दिया। चार बार आन्दोलन

44

1987

जैतपुर कांड को लेकर आन्दोलन।

45

1987

भेड़ भगाओं वन बचाओं आन्दोलनः- अलवर जिले की तहसील थानागाजी के ग्राम कूण्डला वन क्षेत्र में मारवाड़ की भेड बडे पैमाने पर जंगल को नष्ट कर रही थी उनकी स्थाई रोकथाम के लिए कूंडला में सभा कर तीन दिवसीय धरना दिया गया।

46

1987

खुराड मुक्ति आन्दोलनः- खुराड मुक्ति आन्दोलन जयपुर (आमेर के खुराड गांव को एक सामन्त से मुक्त कराया)। एक सामन्त ने पूरे गांव को कटीले तार लगाकर कैद कर लिया था। गांव वाले शमशान में भी शव को दाह संस्कार के लिए नहीं ले जा सकते थे उस सामन्त का आन्दोलन कर आतंक समाप्त करवाया तथा गांव को मुक्त करवाया।

47

1987

झूथाहेडा में डकैती की घटना को लेकर धरना।

48

1987

टोडाभीम में डकैती की घटना को लेकर धरना।

49

1987

कटकड में महिला सहयोगिनी के साथ हुए बलात्कार को लेकर आन्दोलन।

50

1987

इसी प्रकार गांव वीरपुर तहसील महवा में कुआं खोदते समय दो व्यक्ति दबकर मर गये जनान्दोलन कर उनको दो-दो लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिलाई।