17.8.2010
कई वर्षो से राज्य में एस.टी/एस.सी वर्ग के छात्रों की छात्रवृति का वितरण नहीं किया जा रहा था। छात्रवृति की राशि बढाने तथा पेंडिंग छात्रवृति के वितरण हेतु शासन सचिवालय के पास स्थित अम्बेडकर प्रतिमा के पास धरना दिया गया।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के संघर्षों और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक यात्रा
समयरेखा
वर्ष सीमा
कुल आंदोलन
116+
बैच
27
समयरेखा
कुल आंदोलन
116+
बैच
11
कई वर्षो से राज्य में एस.टी/एस.सी वर्ग के छात्रों की छात्रवृति का वितरण नहीं किया जा रहा था। छात्रवृति की राशि बढाने तथा पेंडिंग छात्रवृति के वितरण हेतु शासन सचिवालय के पास स्थित अम्बेडकर प्रतिमा के पास धरना दिया गया।
एडीजे प्रकरण को लेकर जयपुर में धरनाः- राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा में ।क्श्र चयन में अनियमितता की उसे लेकर जयपुर हाईकोर्ट कैम्पस में धरना दिया गया।
बांडी बचाओं हेतु नदी में ही सैकडों लोगों के साथ धरना दिया गया।
निजी लैब द्वारा सरसों तेल की माप घोटाला पर आन्दोलन।
प्रमोद माली हत्याकांडः- ग्राम चैंडियाबास (तहसील लालसोट) की एक माली जाति की विधवा के एक मात्र पुत्र प्रमोद माली को समाज कंटकों ने मारकर मिट्टी में गाड़ दिया। 11 महीने निकलने के बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया। विधवा का रो-रो कर हाल खराब था। बुढापे का एक मात्र साहरा चल बसा। डा. मीणा ने जब पुलिस से पूछा तो पुलिस ने बताया कि प्रमोद कहीं गायब हो गया। डाक्टर मीणा को कहां विश्वास होना था खुद ही गांव में तीन दिन रूक कर पूरे प्रकरण की खुद ने जांच कर हत्यारों को पकड़ लिया और मजमे आम जमीन से नरकंकाल खुदवाकर निकलवाया पुलिस को बुलाकर हत्यारों को सुपुर्द कर दिया, वे तीनों अपराधी मीणा जाति के थे। विधवा को अपनी जेब से 50 हजार का सहयोग दिया कितना गहरा दर्द है गरीब के लिए इस नेता का।
उदयपुर कोटडा (उदयपुर) में 33 आदिवासी भूख से मर गये थे उसको लेकर आन्दोलनः-मुझे पता लगा है कि इस क्षेत्र में लोग भुखमरी के शिकार है तथा भूख से मौते हो रही हैं। पीडीएस का गेहॅूं नहीं मिल रहा इस कारण झेर गांव के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार भी कर दिया। मैं झेर गांव पहुंच गया जहां देखा कि एक नहीं 33 आदिवासी भूख के कारण मर गये सबको भरकर उदयपुर ले गया और कलेक्टर के दरवाजे पर बैठ गया। मांग की इन्हें रोटी दो, रोजी दो। वहीं धरने पर मैने इनका स्वास्थ्य परीक्षण करवाया तो भ्ठ 2ण्5 उह से 4 उह निकला, सोचा कैसे जिन्दा हैं ये लोग। कई दिनों के धरने के बाद सरकार ने कोटड़ा के झेर गांव सहित कई गांवों में अनाज की व्यवस्था की। रोजगार सृजित किए। कुछ दिन बाद वहां सड़क का काम भी चलने लगा, बिजली के खम्भे खड़े होने लगे, एक एनीकट का निर्माण कार्य चालू हुआ। स्कूलों में मास्टर जाने लगे तथा डाक्टर एवं नर्स भी उन्हें संभालने लगे। मैने तय किया कि समूचे आदिवासी की समस्याओं के समाधान के लिए बड़ा मजबूत जनसमर्थित आन्दोलन खड़ा किया जाये। इस दृष्टि से आदिवासी क्षेत्र का चप्पा-चप्पा नापा। व्यापक तैयारी से भयभीत होकर सरकार ने मुझे उदयपुर की एक होटल से गिरफ्तार कर जिला बदर कर दिया। मेरे कुछ समर्थकों को गिरफ्तार कर जेल के सींखचों में डाला। उन्हें यातनाएं दी गई। एक तरह से सरकार ने आदिवासियों के उत्थान के लिए चलाएं जाने वाले अभियान को रोकने का कुत्सित प्रयास किया। इस आन्दोलन में आदिवासी क्षेत्र की जनता का भरपूर सहयोग मिला। मैं सरकार की विशेष पाबंदियों के बाद भी नहीं रूका। मैं मेरी धर्मपत्नी सहित कोटड़ा के गांवों में गये और विशेष कैम्प लगाकर उनको गेहॅू वितरण के कार्य किए। आदिवासी अंचल के अनेक क्षेत्रों में वहां की समस्याओं को लेकर बराबर संघर्ष करता रहा जिससे सरकार भी जागी एवं वहां के आदिवासी नेता भी सक्रिय हुए जिससे आदिवासियों को बहुत राहत मिली। तीन बार।
उदयपुर में आदिवासियों की भुखमरी को लेकर पुनः आन्दोलन किया गया जिसके कारण सरकार ने उदयपुर की एक होटल से गिरफ्तार कर जिला बदर कर दिया तथा उदयपुर प्रवेश पर पाबन्दी लगा दी। उस दौरान मेरे एक दर्जन समर्थकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जिन्हें 10 दिन बाद में छोडा।
एस.टी/एस.सी छात्रों की छात्रवृति को लेकर आन्दोलन।
थाना महवा के सात भ्रष्ट पुलिसकर्मियो को लाइन हाजिर कराने हेतु आन्दोलन।
गंगापुरसिटी में पुल निर्माण की मांग को जनआन्दोलन।
गंगापुरसिटी में बिगडती कानून की स्थिति को लेकर उपखण्ड अधिकारी कार्यालय का घेराव।
गिरीश अग्रवाल हत्याकाण्ड को लेकर करौली में धरना- हिण्डौन में एक व्यापारी गिरीश अग्रवाल को सरेआम चाकू मारकर हत्या कर उसे लूट लिया। लुटेरो को गिरफ्तार करने के लिए करौली में धरना दिया।
सैल्स टैक्स चोरी प्रकरण लालसोट में धरना।
84 कोश परिक्रमा में हो रहे अवैध खनन को लेकर उपखण्ड अधिकारी कामां के यहां विशाल धरना दिया गया।
पांचना बांध के पानी खोले जाने हेतु खण्डीप रेल्वे स्टेशन पर धरना। यहां से सैकड़ों महिलाओं को रेल में भरकर सवाईमाधोपुर ले गये जहां कलेक्टेªट कैम्पस में तीन दिन तक धरना दिया।
पांचना में पानी छोडने हेतु आन्दोलन पीलौदा स्टेशन पर धरना। उस दिन के आन्दोलन को लेकर डा. किरोडीलाल एवं उनके समर्थकों पर धारा 144 के उलंघन के दो मुकदमें भी दर्ज कर लिए।
कामा पुलिस ने दुभार्वना से ग्रसित होकर शेरखां सरपंच को गिरफ्तार किया था उसे छुडाने के लिए रात भर समर्थकों के साथ धरना दिया।
एस.टी आरक्षण को लेकर जयपुर में 2 अक्टूबर को विशाल रैली कर करने के बाद धरना।
जोबनेर विश्वविद्यालय के नामकरण हेतु जोबनेर नगरपालिका चैयरमेन के साथ जोबनेर में धरना।
पीलोडी (सिकन्दरा) महात्मा हत्याकाण्ड नेशनल हाईवे 11 पर स्थित अपनी कुटिया में रह रहे एक बाबा को अपराधी मार गये एवं कीमती सामान एवं नकदी लेकर पार हो गये। इस पर मैने आन्दोलन किया और वारदाती पकडे गये।
ग्राम कवई (बारां) में अडानी समूह की फैक्ट्री में स्थानीय लोगो को रोजगार नहीं देने के उपलक्ष में प्लांट के सामने धरना दिया।
छबडा-छीपाबडौद में किसानों की समस्याओं को लेकर धरना।
कानून की बिगडती स्थिति पर बांदीकुई में धरना।
पानी की मांग करते समय पुलिस ने लाठीचार्ज किया इस दौरान गुड्डी देवी महावर का पुलिस की लात मारने से उसका गर्भ गिर गया इस अन्याय के खिलाफ धरना दिया।