पुलवामा आतंकी हमले में शहीदों की वीरांगनाओं को न्याय दिलाने हेतु आन्दोलनः- पुलवामा आतंकी हमले की तीन वीरांगनाएं श्रीमती मंजू जाट, श्रीमती मधुबाला मीना एवं श्रीमती सुन्दरी गुर्जर दिनांक 28.2.2023 को डा. किरोडीलाल से जयपुर आकर मिली इस विश्वास के साथ कि डा. किरोडीलाल उन्हें राज्य के मा0 मुख्यमंत्री जी से मिलवा देंगे, जिनसे वो मिलने के लिए आतुर थी। दरअसल मे इन तीनों के शहीद पतियों के अंत्येष्टि के समय राजस्थान सरकार के तीन-तीन मंत्रियों ने जाकर हजारों की भीड़ में कुछ आश्वासन दिये थे, वीरांगनाएं उस समय पति शहीद हो जाने के कारण रो-रोकर बेहाल थी, इन्होने अपनी तरफ से कोई मांग सरकार से नही की थी, इनका तो सब कुछ उजड गया था उस सदमे में सब कुछ भूल गई थी किन्तु मंत्रीगणों ने तत्समय बढ चढकर घोषणाएं की थी। आश्वासनों पर जब कोई कार्यवाही नही हुई तो ये तीनों वीरांगनाएं डा. किरोडीलाल के पास 28 फरवरी 2023 को आई और डा. किरोडीलाल इन्हें मा. मुख्यमंत्री जी से मिलाने के लिए विधानसभा ले गये जहां के पश्चिम द्वार पर वीरांगनाओं सहित डा. मीणा को रोक दिया गया तो तीनों वीरांगनाएं मुख्यमंत्री जी से मिलने की जिद कर वहीं धरने पर बैठ गई, इससे चिढकर पुलिस के एक अधिकारी ने मातहतों को कहा उठालो इन महिलाओं को और उन्हें बेरहमी से धक्का-मुक्की कर उठा लिया तथा डा. मीणा सहित दर्जन भर साथियों को भी धक्का-मुक्की देकर एक वाहन में ठूंसकर जयपुर के शहीद स्मारक छोड दिया जहां एक वीरांगना मंजू जाट के साथ धक्का-मुक्की की जिससे वह विलाप करने लगी किन्तु पुलिस ने दया नहीं की। डा. किरोडीलाल उन्हे साथ लेकर शहीद स्मारक धरने पर बैठ गये और एक ही गुहार की कि मुख्यमंत्री जी हमसे मिल तो ले लेकिन जब मुख्यमंत्री जी पिघले नही ंतो डा. किरोडीलाल उनको दिनांक 04 मार्च 2023 को माननीय राज्यपाल महोदय, राजस्थान से मिलाने के लिए ले गये उन्होने आश्वस्त किया कि मैं मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखूंगा, उन्होने यह भी कहा कि आप मुख्यमंत्री जी से जरूर मिल लो, मैं उनको लेकर मुख्यमंत्री जी के सरकारी बंगले की तरफ जाने लगा तो डा0 किरोडीलाल को पुलिस ने पकड़ कर वहीं बैठा दिया किन्तु वीरांगनाएं मुख्यमंत्री के निवास के पास पहुंचने में सफल हो गई इस पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने वीरांगनाओं को सडक पर चोटी पकडकर घसीटा, कपडे भी खींचे, लात-घूसे मारे तथा जबरन पुलिस वाहन में डाल दिया जहां उनके बाल नौचे गये, दो वीरांगनाओं के शरीर पर पिन चुभाई गई एवं अनेक प्रकार की यातनाएं देने के बाद पुलिस उन्हें शहीद स्मारक छोडकर आ गई, जहां डा0 मीणा भी पहुंच गये, वो बार-बार के अपमान से इतनी आह्त थी कि इच्छा मृत्यु का पत्र मा0 राज्यपाल महोदय को लिख दिया। डा0 किरोडीलाल उन तीनों वीरांगनाओं तथा उनके छोटे-छोटे बच्चों के साथ शहीद स्मारक पर खुले आसमान के नीचे बैठा रहा बरसात में भीग गये, जहां पर पुलिस का जबरदस्त पहरा था। अन्त में दिनांक 06.02.2023 को डा0 मीणा उन्हे पूर्व च्ब्ब् ब्ीपम िएवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बंगले पर ले गये जहां उन्होने उनसे प्रार्थना की कि राजस्थान के मुख्यमंत्री तो हमसे मिलना नहीं चाहते ना ही कोई बात सुनना चाहते, आप गांधी परिवार के बहुत नजदीक है हमें पि्रयंका गांधी जी से मिलवा दो ‘‘उन्होने वीरांगनाओं के साथ की गई मारपीट को अनुचित बताया’’ किन्तु आश्वासन के बाद भी वो उन्हें पि्रयंका गांधी से नही मिला सके। अंत में डा. किरोडीलाल उन तीनों वीरांगनाओं को लेकर सिविल लाइन में ही धरना देकर बैठे रहे, एक दिन तो वीरांगनाओं ने मुहॅं में दूब के तांतू दबाकर मुख्यमंत्री जी से मिलने की गुहार की जो किन्तु मा0 मुख्यमंत्री जी नहीं पिघले, उस समय वीरांगनाएं इतने अवसाद में आ गई थी कि उन्होने कहा कि क्या एक मुख्यमंत्री इतना निष्ठुर भी हो सकता है किन्तु मा0 मुख्यमंत्री जी उनसे मिले तक नहीं मांग मानना तो दूर की बात। अंत में दिनांक 10.3.2023 को रात्रि को 3.00 बजे भारी पुलिस बल धरना स्थल पर आ धमके और वीरांगनाओं के मुहॅं में कपडे़ ठूंस दिए, बाल एवं कपडे खींचे, शरीर को नौंचा गया और उन्हें मारते पीटते वहां से उठाकर ले गये। उनके साथ 10-12 कार्यकर्ताओं को भी पुलिस मारते पीटते उठा ले गई। मारपीट के कारण कई के चोटें भी आई। डा. किरोडीलाल उन्हें ढूढने निकले तो जब डा. मीणा जयपुर से मंजू जाट से मिलने उसके घर जा रहे थे तो सामोद थाने के सामने सडक पर भारी पुलिस बल ने डा. मीणा को जाने से रोका, जाने के लिए डा. मीणा ने कई बार आग्रह किया लेकिन पुलिस नहीं मानी तो जाने की जिद लेकर डा. किरोडीलाल वही धरने पर बैठ गये और पुलिस ने डा0 मीणा के साथ धक्का-मुक्की की, बाल खींचे तथा डा0 मीणा के पजामें एवं कुर्ते को भी फाड दिया जिससे डा. किरोडीलाल निर्वस्त्र प्रायः हो गये, और उनके खिलाफ पुलिस ने उल्टा सामोद थाने में राजकार्य में बाधा तथा सरकारी सम्पत्ति को नष्ट करने का मुकदमा दर्ज कर डाला। उसी स्थिति में डा. मीणा को पुलिस के दरिंदों ने पुलिस वाहन में जोर से फैंका तो डा. मीणा की गर्दन दो सीटों के बीच में फंस गई, जिससे ब्मतअपबंस त्महपवद में गंभीर चोट आ गई, बडी मुश्किल से डा. किरोडीलाल ने गर्दन निकाली उसके बाद उन्हें भंयकर चक्कर आने लगे पुलिस उसी हालत में उन्हें सामोद से सीकर की ओर ले गई जिसमें उनके साथ उनका च्ैव् मौजूद था उसने भी उस समय पुलिस वालों को कहा कि ऐसी बर्बरता मत करो साहब पहले से बीमार है इन्हें कुछ हो जायेगा, लेकिन उनकी क्रूरता नही रूकी और उन्हें सीकर के पलसाना के पास से वापिस ले आये तथा वापिस आते समय डा0 मीणा की तबीयत और बिगड गई और उन्हें पुलिस गोविन्दगढ अस्पताल ले गई जहां उनके ।जजमदकंदज जितेन्द्र एवं महेन्द्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, डा. मीणा की तबीयत ज्यादा बिगडी तो पुलिस उन्हें ैडै अस्पताल में ले गये जहां बीमारी की गंभीरता को देखते हुए डाक्टरों ने उन्हें डमकपबंस प्ब्न् में भर्ती कर लिया। ैडै अस्पताल में भी डा0 मीणा के साथ गये कार्यकर्ताओं के साथ राजस्थान की पुलिस ने दुव्र्यवहार किया। नोटः- कौन-कौन सा मुकदमा किस-किस आन्दोलन को लेकर लगा उसका विस्तृत विवरण मय पुख्ता प्रमाणों के डा. किरोड़ीलाल की संघर्ष की गाथा नाम के क्वबनउमदजे में उपलब्ध है। 2019 से मार्च 2023 तक किये गये (113) आन्दोलनों की सूची निम्नानुसार हैः- क्र.स. वर्ष आन्दोलन का विवरण