1990
गंगापुर लोको सेड को गंगापुरसिटी में यथावत रखे जाने तथा करौली को रेल मार्ग से जोडे जाने हेतु आन्दोलन। गंगापुर में दिल्ली-मुम्बई रेल्वे टेªक को जाम कर दिया गया। दो बार।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के संघर्षों और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक यात्रा
समयरेखा
वर्ष सीमा
कुल आंदोलन
116+
बैच
27
समयरेखा
कुल आंदोलन
116+
बैच
4
गंगापुर लोको सेड को गंगापुरसिटी में यथावत रखे जाने तथा करौली को रेल मार्ग से जोडे जाने हेतु आन्दोलन। गंगापुर में दिल्ली-मुम्बई रेल्वे टेªक को जाम कर दिया गया। दो बार।
पशु मुक्ति आन्दोलन (बोदल-खण्डार) सवाईमाधोपुर- खण्डार के बोदल में गुर्जर समाज वन चैकी पर वन विभाग के अधिकारियों ने आस-पास के गांव के पशु पालक गुर्जर समाज के लोगों की करीबन 300 भैंसो को कैद कर लिया तीन दिन तक चले आन्दोलन के बाद उन्हें मुक्त किया।
जोधपुर मरूधर एक्सप्रेस को मण्डावर स्टेशन पर रोके जाने हेतु आन्दोलन।
अदिवासी मीणा सेवा संघ महवा में भूमि दिलाये जाने तहसील मुख्यालय पर धरना।
करौली को रेल्वे लाइन से जोडने हेतु करोली में धरना।
विधानसभा 1990 में महवा में हो रहे चुनाव के दौरान ग्राम समलेटी में बूथकैप्चरिंग की आड़ में फायरिंग की गई जिसमें एक व्यक्ति की छाती में तथा दूसरे के पैर में गोली लगी (हुकुम पुत्र बद्री निवासी समलेटी) तो इसमें जीवन भर के लिए अपंग हो गया, दूसरा युवक भी पंगु है। न्याय दिलाने के लिए थाना मण्डावर पर धरना दिया।
बिगडती हुई कानून स्थिति पर थाना मण्डावर पर धरना।
राममंदिर आन्दोलनः- अयोध्या में राममंदिर निर्माण मुद्दे पर 151 में अयोध्या में सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी दी।
मेहन्दीपुर बालाजी में आदर्श विद्या मंदिर के भवन की जमीन पर मीणा सीमला के लोगों ने कब्जा कर लिया था। आन्दोलन कर इसे मुक्त कराया।
विधायक बत्तीलाल की रिहाईः-पूर्व विधायक बत्तीलाल को जेल से छुडवाने के लिए गंगापुरसिटी में 1991 में धरना दिया एवं जमानत कराने के लिए मैने स्वयं ने कोर्ट में पैरवी कर छुडवाया।
धौलपुर पुलिस फर्जी मुठभेड़ प्रकरण पर आन्दोलन।
बिजली की अनियमित आपूर्ति, भ्रष्टाचार एवं बिजली विभाग द्वारा किसानो के साथ लूटपाट के सम्बन्ध में सवाईमाधोपुर मुख्यालय पर धरना।
क्षेत्र में बिगडती कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंगापुर में धरना।
बिजली की समस्या को लेकर बामनवास में आन्दोलन।
महवा स्कूल में समाज कंटकों ने घुसकर प्रधानाचार्य व अन्य लोगों के साथ मारपीट की जिस पर स्कूली छात्रों ने डा. किरोडीलाल के नेतृत्व में हडताल कर महवा थाने के समक्ष रोष प्रकट कर रास्ता जाम किया।
जयपुर एयरपोर्ट विस्तार को लेकर आन्दोलनः- जयपुर एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर भूमि अवाप्ति में भारी भेदभाव एवं अनियमितताओं के साथ वहां के लोगों को हटाने को लेकर भारी दमन हो रहा था, आन्दोलन कर लोगों को राहत दिलाई।
ट्रक-टैªक्टर आन्दोलन फैलीपुरा प्रकरणः- घटना लगभग 28 वर्ष पूर्व की है। हिण्डौन की ट्रक यूनियन की ज्यादतियों से गुस्साए किसानों ने तत्कालीन सवाईमाधोपुर जिले की हिण्डौन तहसील के फैलीपुरा गांव में करौली और कोटरी पालनपुर के खनन क्षेत्र से आने वाले सैकड़ों ट्रको को बंधक बना लिया था। पूर्वी राजस्थान की सबसे बडी ट्रय यूनियन कही जाने वाली हिण्डौन मजदूर ट्रक यूनियन के ट्रको को टैªक्टर आॅपरेटर्स किसान यूनियन के बैनर तले किसानों द्वारा रोके जाने से दोनो ओर इस कदर तनाव व्याप्त हो गया था कि सशस्त्र संघर्ष की नौबत आ पहुंची। वर्ष 1992 में कडकडाती ठण्ड के बीच भाजपा नेता डा. किरोडीलाल के नेतृत्व में पांच हजार से ज्यादा ग्रामीण तीन दिन तक फैलीपुरा गांव के उस तिराहे पर डटे रहे, जहां खनन क्षेत्र से पत्थर लादकर हिण्डौन की ओर आ रहे सैकडो ट्रको को रोका गया था। दरअसल करौली और हिण्डौन क्षेत्र में सफेद और लाल पत्थर बहुतायत में खदानों से उत्खनित होता था। इसकी बिक्री का प्रमुख केन्द्र तत्समय हिण्डौन हुआ करता था। यहां कई किलोमीटर क्षेत्र में फैले पत्थर फड बाजार से राजस्थान ही नहीं उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में पत्थर ले जाया जाता था। हिण्डौन ट्रक यूनियन के ट्रकों के धंधे का मुख्य आधार भी यही पत्थर उद्योग था। बाद में खनन क्षेत्र से आम ग्रामीण भी अपने टैªक्टर-ट्रालियों से पत्थर ढोने लगे तो ट्रक यूनियन वालो की आंखे किरकिरी होने लगी। ट्रक यूनियन के लोगों ने हिण्डौन एवं महू गांव पर अवैध चैकपोस्ट बनाकर पत्थर ले जा रहे टैªक्टर-ट्राॅलियों को न सिर्फ अवैधानिक वसूली आरम्भ कर दी बल्कि उनका संचालन बन्द करने की भी कुचेष्टा की। ट्रक यूनिय की इस दमनकारी कार्यवाही से उन टैªक्टर-ट्राॅली चालकों एवं किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया, जो करौली एवं हिण्डौन के खनन क्षेत्र से निकलने वाले पत्थर को ढोकर अपनी आजीविका चल रहे थे। ट्रक यूनियन की दादागिरी पर लगाम लगाने के लिए टैªक्टर वालो ने सबसे पहले अपना संगठन बनाया और फिर ट्रैक्टर आपरेटर्स किसान यूनियन से सम्बद्ध कुछ लोग अत्याचार और अनाचार के विरूद्ध संघर्ष के चर्चित भाजपा नेता डा. किरोड़ीलाल मीणा के पास जा पहुंचे। डा. मीणा विस्तार से सारी पीडा सुनने के किसानों के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष की हां भी भरी और निर्धारित समय पर आन्दोलन स्थल फैलीपुरा पहुंच गए। फरवरी का महीना था। सर्दी अभी भी अपने तैवर दिखा रही थी। डा. मीणा की अगुवाई में जुटे किसानों ने रणनीति बनाई। तापने के लिए अलाव जले तो पेट में तपती भूख को शांत करने के लिए आन्दोलन स्थल पर ही लंगर चालू कर दिया। बुजुर्गो के लिए नजदीकी टैंट हाउस से गद्दे और रजाईयों का इंतजाम किया और फिर शुरू हुआ खनन क्षेत्र से पत्थर लादकर ला रहे बंधक बनाए गये ट्रकों में से 26 ट्रक ऐसे भी थे जो राॅयल्टी और टैक्स की चोरी करके पत्थर भर लाए थे। सैकड़ो ट्रकों को फैलीपुरा पर रो लेने की खबर जंगल की आग की भांति हिण्डौन स्थित ट्रक यूनियन के दफ्तर पहुची तो वहां भीषण दनाव का माहौल पैदा हो गया। ट्रक मालिकों ने शीघ्र ही ट्रकों को नहीं छोड़ने की स्थिति में फैलीपुरा कूच की धमकी दे डाली। जब यह खबर फैलीपुरा में आन्दोलनरत किसानों तक पहुंची तो आहवान पर कुछ ही घण्टों में वहां पांच हजार से ज्यादा लोग इकठ्टा हो गये। तनावपूर्ण स्थिति पैदान होने की बात जब पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होने मौके पर पहुंचकर डा. मीणा से बात की लेकिन डा. मीणा टैªक्टर वालो को न्याय दिलाए बगैर बंधक ट्रकों को छोडने के कतई राजी नहीं थे। इसी प्रकार तनावपूर्ण हालातों में तीन दिन बीत गए। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने दोनो पक्षों के साथ वार्ता का दौर जारी रखा। उसका परिणाम यह हुआ कि 67 घण्टे बाद ट्रक यूनियन के पदाधिकारी इस बात पर राजी हो गए कि वे भविष्य में पत्थर भरकर ले जाने वाले किसी भी टैªक्टर-ट्राॅली को नहीं रोकेंगे।
पानी, बिजली, सडक आदि की समस्याओं को लेकर खण्डार में आन्दोलन।
चूडियाबास प्रकरणः- (राजस्थान का मीणा हाईकोर्ट कैसे बना नांगल-प्यारीवास )राजस्थान के दौसा जिले में चूडि़यावास काण्ड के नाम से प्रसिद्ध एक घटना ने छोटी सी जगह नांगल प्यारीवास को मीणा हाईकोर्ट बना डाला। घटना घिनौनी भी थी और शर्मनाक भी। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना में एक विवाहिता ने अपनी मां और मां के प्रेमी के साथ षड़यंत्र रचकर अपने ही पति परमेष्वर की जघन्य हत्या करके लाश को खेत में फिंकवा दिया। मीणा हाईकोर्ट की चैपाल से हत्यारों को सजा सुनाने और सजा को अमलीजामा पहनाते वक्त पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पंचों को जेल की सलाखों के पीछे से बगैर जमानत छुड़ाने तक की दांतों तले अंगुली दबाने जैसी अकल्पनीय कहानी को समझने के लिए घटनाक्रम को सिलसिलेवार जानना निहायत ही जरूरी है। अपने माथे पर सुहागिन का टीका लगाने के बजाय कलंकनी होने का स्थाई चिन्ह स्थापित करने वाली महिला का नाम है प्रेमदेवी। प्रेम की यह तथाकथित देवी तीतरवाड़ा (दौसा) के भगवानाराम को ब्याही गई थी। घटना दिनांक 16 जुलाई 1993 की है। चूडि़यावास (जिला दौसा) में जन्मी प्रेमदेवी ने अपनी मां अमरी देवी और मां के प्रेमी चाचा घासी के साथ मिलकर अपने पति भगवानाराम की हत्या कराई और लाश को खेत में फिंकवा दिया। इस घटना की थ्प्त् छव 159ध्93 थाना नांगल राजावतान में दर्ज हुई लेकिन भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के तहत दर्ज इस जघन्य घटना के मामले को पुलिस ने जल्द ही थ्ण्त् लगाकर दफ्तर दाखिल कर दिया। बात चिन्ताजनक थी, इसीलिए पुलिस के विरूद्ध आमजन में असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त हो गया। 18 जुलाई को इस मामले को लेकर प्रेमदेवी के ससुराल तीतरवाड़ा में पंचायत बैठी, जहां प्रेम ने पंचों के समक्ष भगवानाराम की हत्या की बात कबूल कर ली। जब इस हत्या के प्रकरण को लेकर चूडि़यावास में ही 24 अगस्त 1993 को 11 गांवों की महा पंचायत आयोजित हुई और इसी में काफी विचार विमर्श के बाद अमरी और उसके प्रेमी घासी को हत्या का दोषी मानते हुए दंडित कर दिया। करौली जिले की विख्यात कटकड़ अट्ठाईसा की रोपड़ा की थांई की तर्ज पर दोनों दोषियों को देश निकाला देने के साथ-साथ गांव में निर्वस्त्र कर घुमाने की सजा सुनाई गई। फैसले के अनुसार जघन्य हत्या के दोषी दोनों जनों का मुहॅं काला किया गया। एक-दूसरे के बाल कटवाएं गए और फिर गधे को काला करके घासी को बिठाकर गधे की डोर अमरी को थमाई गई। दोनों को नग्न अवस्था में ही चूडि़यावास गांव में जुलूस निकालने के बाद पैदल ही नांगल प्यारीवास ले जाया गया। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचित कर दिया और मौके पर पहुंची दौसा पुलिस प्यारीवास की झिलमिल नदी के पास से आठ पंचों को गिरफ्तार करके ले गई। निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में भा.द.स. की धारा 147, 365, 366, 354, 327, 323 व 500 के तहत थाना नांगल राजावतान में 24 अगस्त को मुकदमा नं. 193/1993 दर्ज किया गया। यह सही है कि पंचों का फैंसला कानूनी दृष्टि से उचित नहीं था, लेकिन सदियों से चली आ रही खाप पंचायतें ऐसे फैसले सुनाती रही है। इसी सोच और परम्परा के चलते पंचों की गिरफ्तारी से इलाके की जनता भड़क गई। जागरूक लोगों ने गिरफ्तार पंचों की रिहाई के लिए दौसा न्यायालय में जमानत की याचिका भी लगाई लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। तमाम कोशिशें कर थक चुके इलाके के पंच पटैलान अन्त में राजस्थान के कदावर नेता डा. किरोड़ीलाल के पास पहुंचे और उनसे पंचों को छुडवाने की गुहार की। दौसा कोर्ट से जमानत की दरख्वास्त खारिज होने के बाद न्यायिक हिरासत में चल रहे पंचों को छुड़वाने का एकमात्र कानूनी रास्ता राजस्थान हाईकोर्ट में अपील कर जमानत पर छुड़वाना ही एक मात्र उपाय था, लेकिन इसके लिए इलाके के आक्रोशित जनता कतई तैयार नहीं थी। जनतंत्र में जनता की ताकत सर्वोपरि है, इसी बात को स्वीकार करते डा. मीणा ने इस अत्यन्त दुष्कर कार्य की कमान खुद के हाथों में ले ली। न्यायिक हिरासत में रखे गये सभी पंच पटेलों को 24 घण्टे के अन्दर-अन्दर रिहा कर अब मीणा हाईकोर्ट के नाम से प्रसिद्ध नांगल-प्यारीबास में सुपुर्द करने का अल्टीमेटम (चेतावनी) डा. किरोड़ीलाल ने जिला प्रशासन को दे दी। 24 घण्टे में जब जिला प्रशासन ने पंचों को रिहा नहीं किया तो डा. किरोड़ीलाल के आह्वान पर 50 हजार की भीड़ का जन सैलाब कुछ ही समय में ग्राम प्यारीबास में उमड़ पड़ा। जिसमें करीबन 15 हजार महिलाओं सहित प्यारीबास में 50 हजार से ज्यादा लोग इकठ्टा हो गये। इसी दौरान पुलिस ने अमरी एवं घासी को हत्या के मुकदमें में गिरफ्तार कर लिया। पंचों को छुड़ाने के लिए तीन दिन तक धरना चला। धरना इतना विशाल था कि इसे सारे नेषनल मीडिया यहां तक कि बी.बी.सी. ने खूब कवर किया। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत और दौसा के तत्कालीन सांसद राजेश पायलट ने इस विशाल धरने में शिरकत करने की इच्छा जाहिर की लेकिन पंचों ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। धरने को तीन दिन हो जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन के कानों जूं नहीं रेंगी तो डा. मीणा ने पंचों को छुड़ाने के लिए दौसा की ओर कूच का ऐलान कर दिया। लोगों का भारी हुजूम दौसा की ओर चला ही था कि जनता के आक्रोश की आंधी एवं अनिष्ट की आशंका से भयभीत होकर सरकार के हाथ-पांव फूल गये और पुलिस ने हथियार डाल दिये। पुलिस और प्रशासन ने न्यायिक हिरासत में बन्द 14 पंच-पटेलों की रिहाई के लिए कौन-कौन से दांवपेच खेले, कैसे कानून को तोड़ा, कैसे मरोड़ा पता नहीं, लेकिन आश्चर्यजनक सत्य यह है कि तत्कालीन जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सभी 14 पंच-पटेलों को जेल से छुड़ाकर नांगल प्यारीबास पहुंचे और 50 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ के बीच उन्हें डा. किरोड़ीलाल को सुपुर्द कर दिया, तभी से नांगल प्यारीबास के इस स्थान को ‘‘मीणा हाईकोर्ट’’ कहा जाता है।
समलेटी बम काण्ड पर धरना।
जिसका हथौड़ा उसकी खान (मजदूर से बन गए मालिक)ः- धौलपुर-बसेड़ी क्षेत्र की पत्थर खदानों में मजदूरों के शोषण, अवैध वसूली और बंधुआ जैसी परिस्थितियों के खिलाफ व्यापक आन्दोलन किया गया। डा. किरोड़ीलाल के नेतृत्व में लंबे संघर्ष के बाद मजदूरों को संगठित कर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी और खनन क्षेत्र में मजदूरों को राहत मिली। सात बार।
घूमणा के किषनलाल मीणा तहसीलदार की हत्या को लेकर मानपुर थाने पर धरना।
महिलाओं की खरीद-फरोख्त के खिलाफ आन्दोलनः- डांग क्षेत्र (धौलपुर एवं करौली) में महिलाओं को बेचे जाने के लिए मंडिया लगती थी इस बुराई के विरूद्ध जबरदस्त जन समर्थित आन्दोलन किया और पुलिस को मजबूर किया जिससे इस प्रथा पर लगाम लग सकी।
पुलिस हिरासत में मृत्यु को लेकर हिण्डौन में धरना।
शांति जांगिड काण्ड, समलेटीः- सरपंच के चुनाव में एक उम्मीदवार विशेष को वोट नही डालना दौसा जिले का ग्राम समलेटी की एक विधवा शांति जांगिड को बहुत महंगा पड़ा। सरपंच के चुनाव में पराजित उम्मीदवार छुट्टन मीणा ने वोट नही देने पर उसका घर उजाड़ दिया। अशोक को उठाकर घर से बाहर ले जाकर एक जगह चारपाई से बांधकर मारा-पीटा। सूचना पर पुलिस ने अशोक को बदमाशो के चुंगल से छुड़ाया। अभियुक्तों ने महवा में एक मिस्त्री की दुकान पर काम करने वाले विधवा के दोनो बेटे राकेश एवं मुकेश की भी पिटाई कर उससे मजदूरी के पैसे भी छीन कर ले गये। इन दोनो घटनाओं को लेकर थ्प्त् छव 77ध्95 एवं 88ध्95 थाना महवा में दर्ज कराई किन्तु पुलिस ने कोई भी कार्यवाही नहीं की उसके कारण शांति ने गांव भी छोड़ दिया वह डा. किरोड़ीलाल से मिली। डा. किरोड़ीलाल ने इस विधवा महिला के प्रकरण को लेकर पुलिस मुख्यालय जयपुर में तीन दिन तक धरना दिया जब जाकर क्ण्ळण् श्री किशनलाल मीना के निर्देश पर गांव समलेटी में शांति जांगिड़ के घर पुलिस तैनात की जहां वह चैन से रहने लगी। इस प्रकार डा. किरोड़ीलाल ने एक विधवा की रक्षा की।