सीमेन्ट फैक्ट्री आन्दोलनः-सवाईमाधोपुर में एशिया की सबसे बडी सीमेन्ट फैक्ट्री का शुभारंभ 1948 में हुआ था जो जयपुर उद्योग लिमिटेड (श्रटस्) के नाम से स्थापित हुई थी। इसमें करीबन 35000 हजार मजदूर काम करते थे। यह प्लान्ट 1987 में जाकर बन्द हो गया। प्लान्ट के बन्द होने से सभी मजदूर एवं कर्मचारियों को रोजी-रोटी के लाले पड गये। सवाईमाधोपुर का बजरिया मार्केट चैपट हो गया तथा सवाईमाधोपुर कि अर्थव्यवस्था पर इस प्लान्ट के बन्द होने से जबरदस्त विपरीत प्रभाव पडा। सीमेन्ट फैक्ट्री पुनः चालू हो इसके लिए डा. किरोडीलाल ने 1987 से आन्दोलन चालू कर दिया। 1987 से यह आन्दोलन सवाईमाधोपुर की धरती पर चला किन्तु 12 दिसम्बर 1988 को सवाईमाधोपुर के कलेक्टर कैम्पस के सामने पुलिस ने मजदूरो के प्रदर्शन पर ऐसा बर्बर लाठीचार्ज किया कि इस घटना ने अंग्रेजो के राज की याद ताजा कर दी पुलिसकर्मियों ने तीन दर्जन से ज्यादा मजदूरों के हाथ पैर तोड़ दिये महिला मजूदरों एवं नन्हें बच्चों को भी पुलिस ने नहीं बक्सा और उन्हें भी बेरहमी से मारा पीटा। डा. किरोडीलाल भीड को चीरते हुए पुलिस बल के लाठी के प्रहारो को रोकने लगे किन्तु पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.आर.ग्वाला एवं पुलिस अधीक्षक के.के. शर्मा ने पुलिस बल को प्रेरित कर डा. किरोडीलाल पर बेरहमी से लाठियां बरसाना चालू कर दिया। सिर पर पूरी ताकत से एक जगह चार बार लाठी मारी जिससे डा. किरोडी बेहोश होकर कलेक्टेªट कैम्पस में गिर पडे। सिर का कचूमर निकाल दिया, सिर की हड्डी कई जगह से टूट गई और लहुलुहान हो गये। कुछ देर बाद होश आया तो जैसे तैसे खडे होकर पुलिस को रोकने लगे तो पुलिस अधीक्षक ने खोपडी पर रिवोल्वर लगाकर गोली चलाई किन्तु वह मिस कर गई ऐसे समय पर कोर्ट कैम्पस के वकीलों ने डा. किरोडीलाल को बचा लिया। बेहोश हालात में डा. किरोडी एवं अन्य मजदूरों का सवाईमाधोपुर अस्पताल ले गये जहां से गंभीर अवस्था में जयपुर के लिए रैफर कर दिया। पुलिस एक ट्रक में डा. किरोडी को लेकर चली तो जयपुर का नाम लेकर किन्तु दौसा होते हुए अलवर ले गई। दौसाा में पुलिस ने अर्द्धरात्रि को कोतवाली के सामने कड़ाके की ठंड में लिटाकर फिर मारपीट चालू कर दी, किन्तु दौसा के डा. रामराज ने आकर पुलिस से बचाया। कई दिन तक अचेत अवस्था में अलवर अस्पताल में भर्ती रहने के बाद पुलिस ने दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया जहां इलाज चला किन्तु ऐसी बीमारी लग गई जिसका इस देश में कोई इलाज नहीं था। फिर बाद में सरकार ने एक नहीं दो बार अमेरिका में इलाज के लिए भेजा किन्तु स्थाई रूप से फायदा नहीं हुआ अभी भी चक्कर आ जाते हैं तो भारी परेशानी का सामना करना पडता है। अलवर अस्पताल में भर्ती के समय पार्टी ने विशाल आन्दोलन किया, पहले शहर और बाद में अलवर जिला बन्द हुआ, उधर सवाईमाधोपुर मेें उग्र आन्दोलन होने लगे। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद डा. किरोडीलाल सभी मजदूरों को भरकर जयपुर ले आये और तत्समय के प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी से मिलकर फैक्ट्री चलाने की गुहार की। राजीव गांधी से भेंट के बाद करीबन पांच हजार मजदूरों को लेकर डा. किरोडीलाल सिविल लाइन फाटक पर धरना देकर बैठ गये। यह धरना 48 दिन तक चला, इस धरने मेें महिला मजदूर एवं नन्हें बच्चे भी शामिल हुए। अन्त में पुलिस ने यहां भी बर्बर लाठीचार्ज कर दर्जनों बसों में भरकर कडाके की ठंड में जयपुर के आस-पास मजदूरों को जंगल में छोड दिया। डा. किरोडीलाल सहित कुछ मजदूर नेताओं को गिरफ्तार कर पहले सेवर जेल एवं अलवर की जेल में डाल दिया। जेल से रिहाई के बाद जयपुर में फिर धरना दिया गया जो 15 दिन तक चला, इसके बाद पार्टी ने यह आन्दोलन अपने हाथ में ले लिया और इसे पूरे राज्य में चलाया जो महीनों तक चला। इसमें करीबन 36 विधायकों ने 36 दिन तक विभिन्न स्थानों पर गिरफ्तारियां दी, संगठन के बडे-बडे नेता एवं पदाधिकारियों पर गिरफ्तारी देकर इसे उग्र एवं राज्य व्यापी बना दिया। इस मुद्दे को मा. भैरासिंह जी के साथ-साथ मैने विधानसभा एवं संसदमें भी मजबूती से उठाया। जब डा. किरोडीलाल श्रम मंत्री बने तो एक मौका मिला था इसलिए सवाईमाधोपुर के साहूनगर एवं फलौदी क्वारी स्थित सभी 1154 क्वाटर मजदूरों के नाम कर दिये। फैक्ट्री एरिया को नगरपालिका में शामिल करवा दिया। बिजली, पानी, सडक, स्कूल आदि की व्यवस्था करा दी। प्लान्ट चले इस दृष्टि से डा. किरोडीलाल उद्योगपति कमल मुरारका के साथ मजदूरो का समझौता करा दिया जिसमें मजदूरों ने अपने 9 करोड की मजदूरी छोड दी। सरकार ने भी करीबन 26 करोड की स्पंइपसपजल खत्म कर प्लान्ट को टपंइसम बना दिया किन्तु सेड की मंशा प्लान्ट चलाने की नहीं थी उसकी नीयत इसके करोडों की प्रोपर्टी को खुर्दमुर्द करने की थी, इसलिए फैक्ट्री नहीं चली। इस फैक्ट्री को आन्दोलन 1987, 1988, 1989 (पूरे वर्ष सतत) तीन साल तक चला। अब जब सेठ मजदूरों के क्वाटर्स खाली करवाना चाहता है तथा करीबन 45000 हजार करोड की प्रोपर्टी को बेचान करना चाहता है तो डा. किरोडीलाल की अगुवाई में पहले सवाईमाधोपुर में आन्दोलन किया गया और बाद में जयपुर के विधानसभा का घेराव कर प्रदर्शन किया। हरगिज फैक्ट्री की करोडो की प्रोपर्टी को बचाया जाये आवश्यकता पडी तो पुनः 1988-1989 का उग्र आन्दोलन फिर से किया जायेगा। इस प्रकार सीमेन्ट फैक्ट्री का यह आन्दोलन राजस्थान इतिहास में सर्वाधिक लम्बा एवं पूरी पार्टी को ताकत देने वाला आन्दोलन था। इसे तबके राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. लालकृष्ण अडवाणी ने ऐतिहासिक कहा था। मा0 अटल बिहारी बाजपेयी जी ने भी इसे सराहा था तथा दोनो नेताओं ने इसे संसद में भी उठाया। इस फैक्ट्री के लम्बे आन्दोलन ने जिन लोगोें ने सक्रिय भूमिका निभाई उनमें से 9 विधायक बन गये तथा दो लोग सांसद बन गये। लोकसभा के अध्यक्ष मा. ओम बिडला फैक्ट्री आन्दोलन की देन है। मा. भैरोसिंह शेखावत, ललित किशोर चतुर्वेदी, पार्टी के 33 विधायकों सहित राज्य के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी ने इस आन्दोलन को राज्य स्तर तक उठाया। यह आन्दोलन 1987 से 1989 के मध्य तक चला। (1) जून 1988, (2) दिसम्बर 1988, (3) सितम्बर 1989 एवं (4) दिसम्बर 1990, 4 बार। आन्दोलन।