Major Movements

The historical journey of struggles and public movements led by Dr. Kirodi Lal Meena

1987 - अगस्त 199011% Complete
1987 - अगस्त 1990

1987 - अगस्त 1990

Timeline

Total Movements

116+

Batch

3

Movements: 51-75
51

1987

महिला की बरामदगी हेतु आन्दोलनः- श्यारोली (गंगापुर) की एक महिला (जाट समाज की) का एक मुस्लिम ने अपहरण कर लिया था। श्यारोली से 3-4 हजार लोग भरकर गंगापुरसिटी कोर्ट में भरकर ले गया। लडकी के बयान के समय पूरे कोर्ट को घेर कर धरना देकर महिला को समाज कंटकों से मुक्त कराया।

52

1987

महवा के ग्राम वीरपुर के लोगों पर पुलिस ने भारी अत्याचार किए उसके खिलाफ आन्दोलन किया।

53

1988

महाणा सामूहिक बलात्कार काण्डः- जिला सवाईमाधोपुर के थाना गढमोरा के ग्राम महाणा में गुर्जर समाज के कुछ लोगों ने 10.9.1988 की रात्रि को लगभग 10.00 बजे कुछ असामाजिक तत्वों (गुर्जर समाज के लोगों ने) बैरवा जाति के घरो पर धाबा बोलकर उनके घर में उपस्थित श्रीमती रामपति बैरवा एवं श्रीमती केशन्ती बैरवा के साथ करीबन 6 लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद ये बलात्कारी उनके घर से सारा सामान भी उठाकर ले गये। इस घटना के कारण बैरवा जाति के लोगों में भंयकर भय उत्पन्न हो गया जिससे डर कर ये सब गांव छोड़कर पलायन कर गये इस घटना की जानकारी तार व टेलीफोन द्वारा 13.9.1988 को मुख्यमंत्री से लेकर अन्य अधीनस्थ अधिकारियों तक दी गई, परन्तु कोई भी कार्यवाही उस समय नही हुई तो पीडि़त पक्ष दिनांक 16.9. 1988 को एक लिखित आवेदन के साथ पुलिस अधीक्षक सवाईमाधोपुर से मिला फिर भी कोई कार्यवाही नही हुई तो दिनांक 30.9.1988 को पीडि़त परिवार मुझसे मिला जिन्हें लेकर मैने उन्हें प्रतिपक्ष के नेता मा0 भैरोसिंह जी से मिलाया। मा. भैरोसिंह जी की सलाह पर पीडित परिवार को लेकर मै दिनांक 14.10.1988 को राजभवन के सामने धरना पर बैठ गया जब जाकर बलात्कारियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज हुआ और नामजद अपराधियों को गिरफ्तार किया गया उनको बचाने के लिए गुर्जर समाज के लोगो ने दिनांक 25.10.1988 को नादौती में बडी सभा भी की तथा एक बडे़ आन्दोलन की चेतावनी भी सरकार को दे दी किन्तु हमारे सत्त आन्दोलन के कारण महाणा कांड की सच्चाई दबाई नही जा सकी। बैरवा एवं मजबूत समाज के पीडि़त लोगों को हम न्याय दिलाने में सफल हुए।

54

1988

सीमेन्ट फैक्ट्री आन्दोलनः-सवाईमाधोपुर में एशिया की सबसे बडी सीमेन्ट फैक्ट्री का शुभारंभ 1948 में हुआ था जो जयपुर उद्योग लिमिटेड (श्रटस्) के नाम से स्थापित हुई थी। इसमें करीबन 35000 हजार मजदूर काम करते थे। यह प्लान्ट 1987 में जाकर बन्द हो गया। प्लान्ट के बन्द होने से सभी मजदूर एवं कर्मचारियों को रोजी-रोटी के लाले पड गये। सवाईमाधोपुर का बजरिया मार्केट चैपट हो गया तथा सवाईमाधोपुर कि अर्थव्यवस्था पर इस प्लान्ट के बन्द होने से जबरदस्त विपरीत प्रभाव पडा। सीमेन्ट फैक्ट्री पुनः चालू हो इसके लिए डा. किरोडीलाल ने 1987 से आन्दोलन चालू कर दिया। 1987 से यह आन्दोलन सवाईमाधोपुर की धरती पर चला किन्तु 12 दिसम्बर 1988 को सवाईमाधोपुर के कलेक्टर कैम्पस के सामने पुलिस ने मजदूरो के प्रदर्शन पर ऐसा बर्बर लाठीचार्ज किया कि इस घटना ने अंग्रेजो के राज की याद ताजा कर दी पुलिसकर्मियों ने तीन दर्जन से ज्यादा मजदूरों के हाथ पैर तोड़ दिये महिला मजूदरों एवं नन्हें बच्चों को भी पुलिस ने नहीं बक्सा और उन्हें भी बेरहमी से मारा पीटा। डा. किरोडीलाल भीड को चीरते हुए पुलिस बल के लाठी के प्रहारो को रोकने लगे किन्तु पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.आर.ग्वाला एवं पुलिस अधीक्षक के.के. शर्मा ने पुलिस बल को प्रेरित कर डा. किरोडीलाल पर बेरहमी से लाठियां बरसाना चालू कर दिया। सिर पर पूरी ताकत से एक जगह चार बार लाठी मारी जिससे डा. किरोडी बेहोश होकर कलेक्टेªट कैम्पस में गिर पडे। सिर का कचूमर निकाल दिया, सिर की हड्डी कई जगह से टूट गई और लहुलुहान हो गये। कुछ देर बाद होश आया तो जैसे तैसे खडे होकर पुलिस को रोकने लगे तो पुलिस अधीक्षक ने खोपडी पर रिवोल्वर लगाकर गोली चलाई किन्तु वह मिस कर गई ऐसे समय पर कोर्ट कैम्पस के वकीलों ने डा. किरोडीलाल को बचा लिया। बेहोश हालात में डा. किरोडी एवं अन्य मजदूरों का सवाईमाधोपुर अस्पताल ले गये जहां से गंभीर अवस्था में जयपुर के लिए रैफर कर दिया। पुलिस एक ट्रक में डा. किरोडी को लेकर चली तो जयपुर का नाम लेकर किन्तु दौसा होते हुए अलवर ले गई। दौसाा में पुलिस ने अर्द्धरात्रि को कोतवाली के सामने कड़ाके की ठंड में लिटाकर फिर मारपीट चालू कर दी, किन्तु दौसा के डा. रामराज ने आकर पुलिस से बचाया। कई दिन तक अचेत अवस्था में अलवर अस्पताल में भर्ती रहने के बाद पुलिस ने दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया जहां इलाज चला किन्तु ऐसी बीमारी लग गई जिसका इस देश में कोई इलाज नहीं था। फिर बाद में सरकार ने एक नहीं दो बार अमेरिका में इलाज के लिए भेजा किन्तु स्थाई रूप से फायदा नहीं हुआ अभी भी चक्कर आ जाते हैं तो भारी परेशानी का सामना करना पडता है। अलवर अस्पताल में भर्ती के समय पार्टी ने विशाल आन्दोलन किया, पहले शहर और बाद में अलवर जिला बन्द हुआ, उधर सवाईमाधोपुर मेें उग्र आन्दोलन होने लगे। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद डा. किरोडीलाल सभी मजदूरों को भरकर जयपुर ले आये और तत्समय के प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी से मिलकर फैक्ट्री चलाने की गुहार की। राजीव गांधी से भेंट के बाद करीबन पांच हजार मजदूरों को लेकर डा. किरोडीलाल सिविल लाइन फाटक पर धरना देकर बैठ गये। यह धरना 48 दिन तक चला, इस धरने मेें महिला मजदूर एवं नन्हें बच्चे भी शामिल हुए। अन्त में पुलिस ने यहां भी बर्बर लाठीचार्ज कर दर्जनों बसों में भरकर कडाके की ठंड में जयपुर के आस-पास मजदूरों को जंगल में छोड दिया। डा. किरोडीलाल सहित कुछ मजदूर नेताओं को गिरफ्तार कर पहले सेवर जेल एवं अलवर की जेल में डाल दिया। जेल से रिहाई के बाद जयपुर में फिर धरना दिया गया जो 15 दिन तक चला, इसके बाद पार्टी ने यह आन्दोलन अपने हाथ में ले लिया और इसे पूरे राज्य में चलाया जो महीनों तक चला। इसमें करीबन 36 विधायकों ने 36 दिन तक विभिन्न स्थानों पर गिरफ्तारियां दी, संगठन के बडे-बडे नेता एवं पदाधिकारियों पर गिरफ्तारी देकर इसे उग्र एवं राज्य व्यापी बना दिया। इस मुद्दे को मा. भैरासिंह जी के साथ-साथ मैने विधानसभा एवं संसदमें भी मजबूती से उठाया। जब डा. किरोडीलाल श्रम मंत्री बने तो एक मौका मिला था इसलिए सवाईमाधोपुर के साहूनगर एवं फलौदी क्वारी स्थित सभी 1154 क्वाटर मजदूरों के नाम कर दिये। फैक्ट्री एरिया को नगरपालिका में शामिल करवा दिया। बिजली, पानी, सडक, स्कूल आदि की व्यवस्था करा दी। प्लान्ट चले इस दृष्टि से डा. किरोडीलाल उद्योगपति कमल मुरारका के साथ मजदूरो का समझौता करा दिया जिसमें मजदूरों ने अपने 9 करोड की मजदूरी छोड दी। सरकार ने भी करीबन 26 करोड की स्पंइपसपजल खत्म कर प्लान्ट को टपंइसम बना दिया किन्तु सेड की मंशा प्लान्ट चलाने की नहीं थी उसकी नीयत इसके करोडों की प्रोपर्टी को खुर्दमुर्द करने की थी, इसलिए फैक्ट्री नहीं चली। इस फैक्ट्री को आन्दोलन 1987, 1988, 1989 (पूरे वर्ष सतत) तीन साल तक चला। अब जब सेठ मजदूरों के क्वाटर्स खाली करवाना चाहता है तथा करीबन 45000 हजार करोड की प्रोपर्टी को बेचान करना चाहता है तो डा. किरोडीलाल की अगुवाई में पहले सवाईमाधोपुर में आन्दोलन किया गया और बाद में जयपुर के विधानसभा का घेराव कर प्रदर्शन किया। हरगिज फैक्ट्री की करोडो की प्रोपर्टी को बचाया जाये आवश्यकता पडी तो पुनः 1988-1989 का उग्र आन्दोलन फिर से किया जायेगा। इस प्रकार सीमेन्ट फैक्ट्री का यह आन्दोलन राजस्थान इतिहास में सर्वाधिक लम्बा एवं पूरी पार्टी को ताकत देने वाला आन्दोलन था। इसे तबके राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. लालकृष्ण अडवाणी ने ऐतिहासिक कहा था। मा0 अटल बिहारी बाजपेयी जी ने भी इसे सराहा था तथा दोनो नेताओं ने इसे संसद में भी उठाया। इस फैक्ट्री के लम्बे आन्दोलन ने जिन लोगोें ने सक्रिय भूमिका निभाई उनमें से 9 विधायक बन गये तथा दो लोग सांसद बन गये। लोकसभा के अध्यक्ष मा. ओम बिडला फैक्ट्री आन्दोलन की देन है। मा. भैरोसिंह शेखावत, ललित किशोर चतुर्वेदी, पार्टी के 33 विधायकों सहित राज्य के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी ने इस आन्दोलन को राज्य स्तर तक उठाया। यह आन्दोलन 1987 से 1989 के मध्य तक चला। (1) जून 1988, (2) दिसम्बर 1988, (3) सितम्बर 1989 एवं (4) दिसम्बर 1990, 4 बार। आन्दोलन।

55

1988

श्यामलाल हत्याकाण्ड मासलपुर को लेकर आन्दोलन।

56

1988

बीना पाराशर युवती बलात्कार काण्डः-बीना पाराशर नाम की युवती के साथ सामूहिक बलात्कार कर उसे रेल की पट्री पर डाल दिया, आन्दोलन कर अपराधियों को गिरफ्तार कराया।

57

1988

महवा में एक ब्राहमण की लडकी का वहीं के गुर्जरो ने अपहरण कर लिया उसे बरामद करने के लिए महवा थाने पर तीन दिन तक धरना।

58

1988

महवा को दौसा में मिलाने के लिए आन्दोलन।

59

1988

शिवसिंह हत्याकांडः- कांग्रेस के पूर्व विधायक शिवसिंह हत्याकाण्ड 30.8.1988, 7.9.88, 7.10.88 को बाडी में तीन बार आन्दोलन एवं 7.9.1988 को पुनः तीन बार आन्दोलन। पूर्व विधायक की बाडी में नृशंश हत्या कर दी थी। हत्यारे नहीं पकडे गये तो जनता के साथ बडा धरना दिया गया इस धरने में प्रतिपक्ष के नेता मा. भैरोसिंह जी भी पहुंचे।

60

1989

सामूहिक बलात्कार कांडः- सपोटरा में एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया तथा उसकी एवं उसकी मां की हत्या कर दी गई जिसके लिए आन्दोलन किया गया।

61

1989

ताहिर मोहम्मद हत्याकाण्ड गंगापुरसिटी को लेकर आन्दोलन।

62

1989

कचीदा (रावल) बाबा के अनैतिक कृत्यों के खिलाफ आन्दोलनः- ग्राम रावल (सवाईमाधोपुर) में कुटिया बनाकर बाबा कचीदा उर्फ सत्यनारायण रहता था इनके यहां जनता के अलावा पुलिस के अधिकारी अधिकतर आया जाया करते थे। इस बाबा ने कैलाशी पुत्री मंगल्या मीना निवासी रावल थाना सवाईमाधोपुर के साथ प्रसाद में नशीली चीज खिलाकर बलात्कार किया। लड़की मात्र 15 वर्ष की थी। लड़की ने इस कुकृत्य का विरोध किया तो बाबा ने उसे बुरी तरह डरा दिया। पुलिस से जान पहचान का बेजा फायदा उठाकर बच्ची को नशे की दवाएं खिलाता रहा और उससे बलात्कार करता रहा जिससे वह गर्भवती हो गई। उस पर दबाव डालकर उसका गर्भ भी गिरवा दिया अन्त में जाकर लड़की ने जब यह आप बीती अपने मां-बाप को सुनाई तथा उन्होने घटना की जानकारी मुझे दी तो मैने इस कुकृत्य के खिलाफ उग्र जनआन्दोलन किया। इस मामले को मैने विधानसभा में भी उठाया। गृहमंत्री श्री अशोक गहलोत के आश्वासन के बाद कचीदा वाले बलात्कारी बाबा को गिरफ्तार कर जेल के सींखचों मे डाल दिया।

63

1989

ग्राम चांदेरा (थाना मानपुर) के एक व्यक्ति से मानपुर थाने के हैड कांस्टेबिल ने 2500 रूपये रिश्वत के ले लिए उन्हे वापस दिलाने के लिए थाना मानपुर में धरना दिया और रिश्वत वापस दिलाई।

64

1989

सूरेर पाडली (दौसा) के रतीराम का हत्याकाण्ड को लेकर मण्डावर थाने पर धरना।

65

1989

विधानसभा क्षेत्र महवा में बाधित विद्युत सप्लाई को लेकर दो दिन तक बिजली विभाग के कार्यालय पर धरना देकर बिजली सप्लाई में सुधार करवाया।

66

1989

बिजली हेतु आन्दोलनः- श्रीमहावीरजी क्षेत्र की अनियमित बिजली सप्लाई को लेकर 89 में पटोदा स्टेशन पर विशाला धरना दिया तथा पर्याप्त मात्रा में बिजली देना सुनिश्चित कराया गया।

67

1989

कैला देवी मीणा धर्मशाला के निर्माण में ट्रस्ट द्वारा रोक लगा दी गई उसके खिलाफ एक बडी सभा कर आन्दोलन कर समाज को जमीन उपलब्ध कराई

68

1989

हिण्डौन में समाज कंटकों द्वारा समर्थकों पर प्राणघातक हमला किया गया इसको लेकर आन्दोलन कर उन्हें गिरफ्तार कराया।

69

1989

इंदिरा स्पजि प्ततपहंजपवद च्तवरमबज हेतु आन्दोलनः- चम्बल से सिंचाई एवं पीने हेतु पानी सवाईमाधोगपुर जिले को मिले इसके लिए यह योजना बनाई गई जिसकी स्वीकृति के लिए कलेक्टेªट सवाईमाधोपुर पर 10 दिन तक धरना दिया।

70

13.1.1989

सपोटरा पुलिस द्वारा 17 निर्दोष लोगों को राजनैतिक दबाव में गिरफ्तार कर लिया था उनको छुड़ाने के लिए 13.1.1989 को थाने पर सैकडो लोगों के साथ धरना दिया गया।

71

मई 1989

महवा को दौसा जिले में मिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री भैरोसिंह का घेराव।

72

17.7.1989

सवाईमाधोपुर जिला प्रमुख द्वारा विदेषी महिला के साथ छेडछाड को लेकर सवाईमाधोपुर में धरनाः-

73

1989

ससेडी कांड (डकैतों की बर्बरता)ः- 1989 के लोकसभा चुनाव के दौरान भगवानंिसह गुर्जर नाम के डकैत ने माली परिवार के तीन युवकों को मौत के घाट उतार दिया। हुआ यूं कि माली परिवार के एक युवक ने भगवानसिंह गुर्जर डकैत की ससेडी में रूके रहने की सूचना पुलिस को दे दी जिसकी जानकारी गुर्जर डकैत को मिल गई उससे डकैत भगवानसिंह इतना तमतमाया कि वह माली परिवर के घर आ धमका औश्र बूढे मां-बाप के सामने ही डकैत ने खंजर से एक बेटे के टुकडे-टुकडे कर डाले फिर दूसरे को भी ऐसे ही मार दिया, कितना वीभत्सकारी दृष्य था। तीसरे के प्राण बच जाये इसके लिए मां-बाप डकैत के पैर में पड गये बुढापे की सेवा के लिए एक औलाद को बक्सने की प्रार्थना की, किन्तु वह क्रूर डकैत नहीं माना। उसने बूढे मां-बाप के ठोकर मारी और तीसरे बेटे को भी उसके सामने मौत के घाट उतार दिया। घटना के समय लोकसभा के चुनाव चल रहे थे तथा मैं सवाईमाधोपुर से सांसद का चुनाव लड़ रहा था। उन तीनों बेटों की लाशों को लेकर मैने करौली थाने का घेराव किया तथा पुलिस को चेतावनी देते हुए चलते चुनाव में प्रतिज्ञा ली की मैं इस चुनाव में जीतू या नहीं चुनाव के बाद डकैतों का सफाया करूंगा या तो डांग में डकैत रहेंगे या डा. किरोडीलाल की जनता। दूसरी घटना डकैत भगवानंिसह गुर्जर ने लांगरा बुगडार की एक जाटव महिला से उसकी सुन्दर बेटी को पेश करने को कहा उसने मना कर दिया तो जब वह खान पर मजदूरी करने गई तो डकैत उस खान पर पहुंचा और कहा कि कहां है तेरी लड़की उसे ला। उसने लडकी को उसे पेश करने से मना कर दिया तो उस क्रूर ने उस महिला के हाथों में कील ठोक दी। की ठुके लहुलुहान हाथ मेने देखा तो मेरा खून खौल गया। भयभीत वह महिला कह रही थी कि मैं गांव छोडकर जा रही हॅू, मैने उस महिला को अश्वस्त किया चुनाव खत्म हो जाए इसका बदला मैं लूंगा। मैं प्रचंड मतों से सवाईमाधोपुर से चुनाव जीता और चुनाव जीतने के बाद मैं राज्य के मुख्यमंत्री श्रीमान भैरोसिंह जी से मिलकर डकैत भगवानंिसह को मारकर उसके आतंक को खतम करने का आग्रह किया, 6 महीने निकल गये लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देर्शो पर कुछ भी कार्यवाही नहीं हुई तो मैं करीबन 5 हजार लोग एवं 6 विधायकों को लेकर करौली के बीहडों में बन्दूक लेकर डकैतों को मारने पहुंच गया। एक नहीं 15 दिन तक चप्पे-चप्पे को छान मारा आखिर में जनता का दबाव इतना बढा की उस डकैत को पुलिस ने मार गिराया और मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई जिससे जनता को भारी राहत मिली।

74

अगस्त 1990

एस.टी/एस.सी. अधिकारियों को राजनैतिक द्वैषभाव से प्रताडि़त करने पर मुख्यमंत्री के आवास पर धरना।

75

तिमनगढ मूर्ति काण्डः- तिमनगढ मूर्तिकांड को लेकर धरना। यहां वर्षो से ऐतिहासिक मूर्तियों की

चोरिया हो रही थी, चोरियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए करौली में सैकड़ों लोगों के साथ 7 दिन तक धरना दिया गया।